राकेश कुमार आर्य

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राकेश कुमार आर्य


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कांग्रेस का सोनिया काल

Posted On: 12 Dec, 2017  
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शिक्षा का व्यावसायीकरण एक अभिशाप

Posted On: 4 Dec, 2017  
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क्यों कर रहा है किसान आत्महत्या?

Posted On: 28 Jun, 2017  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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21 जून : भारत वंदन दिवस

Posted On: 21 Jun, 2017  
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Special Days में

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भज ‘कोविन्दम्’ हरे-हरे

Posted On: 21 Jun, 2017  
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पॉलिटिकल एक्सप्रेस में

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नववर्ष मनायें या नवसंवत्सरोत्सव

Posted On: 1 Jan, 2017  
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Hindi Sahitya Special Days में

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के द्वारा: राकेश कुमार आर्य राकेश कुमार आर्य

के द्वारा: राकेश कुमार आर्य राकेश कुमार आर्य

के द्वारा: राकेश कुमार आर्य राकेश कुमार आर्य

आदरणीय श्री राकेश कुमार आर्य साहब, सादर अभिवादन! सर्वप्रथम साप्ताहिक सम्मान और संतुलित आलेख के लिए बधाई! इस बार मुलायम सिंह ने भी संतुलित और सधे शब्दों में नोटबंदी की आलोचना की थी. शरद यादव ज्यादा समय या तो मौन रहे या नीतीश के समर्थन के कारण भी चुप रहे होंगे. हाँ हो हल्ला पर किस्से बड़े नेता आडवाणी जी को छोड़कर चिंता जाहिर नहीं की. संसद का पूरा सत्र बर्बाद हो गया ... प्रधान मंत्री जन सभाओं में एक तरफा बोलते रहे संसद का सामना नहीं कर सके. देश का तो भगवन ही मालिक है जनता के हाथ में पांच साल के बाद एक बार मौका आता है वह भी हवा या आंधी में उड़ जाता है. अभी तक केंद्र सरकार की उपलब्धि को संतोष जनक तो नहीं कहा जा सकता. सादर!

के द्वारा: jlsingh jlsingh

जय श्री राम राकेश जी संसद रोकने के लिए विरोधी दल ही ज़िम्मेदार है सरकार तो बहस चाहती लेकिन विरोधी दल लोक सभा चुन्नव हारने से इतने निराश हो गए की हर बात में शुरू से संसद रोकने में लगे इन नेताओं को देश की परवाह नहीऔर बेशर्मी से अपनी तनख्वाह और भत्ते भी लेते लेकिन देश के वे मूर्ख बुद्दिजीवी कहाँ चले गए जो दादरी में अपने अवार्ड लौटा रहे थे मीडिया भी ममता.ओएव्सी केजरीवाल राहुल मायावती  डरती इसीलिए उनके गलत कारनामे पर चुप बंगाल में दंगे हो रहे सेक्युलर मीडिया और बुद्दिजीवी क्यों चुप?दोह्रामाप्दंड क्यों?नोट बंदी पर हल्ला इसलिए मचा रही क्योंकि इनके कली कमाई बेकार हो गयी आपके विश्लेषण के कुछ अंशो से सहमत लेकिन सरकार की गलती नहीं .लेख के लिए धन्यवाद्

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

के द्वारा: राकेश कुमार आर्य राकेश कुमार आर्य

जय श्री राम राकेश जी आपने जो कहा सहमत हूँ नोट बंदी से जो कल्ला मचा रहे उन्होंने देश का अरबो रुपया बेईमानी से इकठ्ठा किया व बेकार हो गया इसीलिये चिल्ला रहे मोदीजी देश की ७० साल की गंदगी को दूर करने में लगे है जिसमे समय लगेगा परन्तु ये नेता च्गाहते थे की मोदीजी कुछ समय दे देते जिससे वे काले धन को सफ़ेद कर लेते जो सासद संसद को वाधित कर रहे वे देश के दुश्मन है जनता के दुश्मन है देश का धन बर्बाद कर रहे जनता इन्हें जवाब देगी.इन्ही नेताओं ने मुस्लिम तुष्टीकरण के नाम पर देश को बर्बाद कर दिया इनको देश से ज्यादा मुस्लिम वोट प्यारे है शर्म आती ऐसे नेताओं पर देश के शहीद और गांधीजी की आर्माये रो रही होगी बहुत अच्छी प्रस्तुति.

के द्वारा: rameshagarwal rameshagarwal

राकेश जी आपने लिखा तो बहुत सही है परंतु हमे क्या करना चाहिए या फिर जो आप के हिसाब से गलत हो रहा है उसको सुधारने का क्या तरीका हो सकता है वो नहीं बताया, मेरे हिसाब से धर्मनिरपेछता को फिर से परिभाषित करने की अहम् आवश्यकता है. आरक्षण और पर्सनल लॉ समाप्त हो "एक हिंदुस्तान एक कानून" की अवधारणा लागू हो इलेक्शन में प्रचार का सारा खर्च इलेक्शन कमिशन द्वारा हो किसी भी प्रत्याशी को दो कार के अलावा किसी खर्चे की अनुमति न हो. हर किसी को ग्रेजुएट तक एजुकेशन फ्री हो. हर नागरिक को उसके कार्यदायी जीवन में दिए गए इनकम टैक्स के अनुपात में पेंशन दी जाये तभी हम काले धन की प्रवर्ती से बहार आ सकते हैं जिसका सीधा प्रभाव हमारी चुनाव प्रक्रिया पर होगा और कोई भी वर्ग केवल वोट बैंक नहीं बन पायेगा.

के द्वारा:




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